Biography Of In Hindi Biography In Hindi Jeevan Parichay Jivan Parichay Lekhak Parichay Sahityik Parichay Rachnayen Bhasha Shaili Study Arpit Hindi Jeevan Parichay Biography Of In Hindi Biography In Hindi.
(जीवनकाल सन् 1905 ई० से सन् 1990 ई०) जीवन परिचय - हिन्दी साहित्य में एकांकी के जन्मदाता डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जनपद में 15 सितम्बर, सन् 1905 ई० को हुआ था। आपके पिता का नाम श्री लक्ष्मीप्रसाद वर्मा था, जो मध्य प्रदेश में डिप्टी कलक्टर थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा नरसिंहपुर और जबलपुर आदि स्थानों पर हुयी। आपने हिन्दी में एम० ए० की परीक्षा सन् 1921 ई० में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर उत्तीर्ण की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने आपको प्रतिभाशाली छात्र के रूप में गोल्ड मेडिल प्रदान किया। आपने नागपुर विश्वविद्यालय से 'हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' विषय पर शोध करके पी-एच० डी० की उपाधि प्राप्त की। अनेक वर्षों तक आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष पद को सुशोभित किया। भारत सरकार ने आपको सन् 1963 ई० में पद्मभूषण की उपाधि से तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने साहित्य-वाचस्पति की उपाधि से अलंकृत किया। हिन्दी प्राध्यापक के रूप में आप तत्कालीन सोवियत संघ तथा श्रीलंका भी गये। मध्य प्रदेश सरकार ने आपकी रचनाओं...
( जीवनकाल सन् 1896 ई० से सन् 1974 ई० ) जीवन परिचय - सेठ गोविन्ददास का जन्म जबलपुर नामक नगर के सम्पन्न और धार्मिक परिवार में सन् 1896 ई० में हुआ था। आप धार्मिक प्रवृत्ति के थे। बचपन से ही आप धार्मिक उत्सवों के प्रति रुचि रखते थे। आप बल्लभ सम्प्रदाय के अनुयायी बन गये थे। बचपन में ही बल्लभ सम्प्रदाय में होने वाले उत्सवों और लीलाओं का आपके ऊपर प्रभाव पड़ा; अत: नाटक लिखने की प्रेरणा बचपन से ही जाग्रत हो गयी थी। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई थी। तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप आपने घर पर ही हिन्दी, ॲंग्रेजी भाषाओं का अध्ययन किया। आपका अधिकांश जीवन राजनीति में बीता। गाॅंधीजी के सम्पर्क में आने पर आप अनेक बार कारागार भी गये और स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद संसद-सदस्य रहे। आप हिन्दी को राष्ट्रभाषा पद पर प्रतिष्ठित कराने हेतु हमेशा प्रयत्नशील रहे। आपके संघर्ष का ही फल है कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का स्थान मिला। इनका स्वर्गवास सन् 1974 ई० में हो गया। रचनाऍं 'अष्टदश' 'पंचभूत' 'चतुष्पद' 'सप्तरश्मि' 'एकादशी' 'आपबीती' 'जगबीती' भाष...
( जीवनकाल सन् 1864 ई॰ से सन् 1938 ई॰ ) जीवन परिचय - हिन्दी भाषा के परिष्कारक, उत्कृष्ट निबन्धकार, आदर्श सम्पादक एवं प्रखर आलोचक आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1864 ई॰ में रायबरेली जिले के दौलतपुर ग्राम में हुआ था। स्कूली शिक्षा समाप्त कर इन्होंने जी.आर.पी. रेलवे में नौकरी कर ली। रेलवे विभाग में नौकरी करते हुए इन्होंने घर पर ही संस्कृत, अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी, बंगला और उर्दू भाषाओं का ज्ञान स्वाध्याय से प्राप्त किया। रेलवे तार विभाग में कुछ समय नौकरी करने के उपरान्त सन् 1903 ई॰ में नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और साहित्य सेवा को समर्पित हो गए। सन् 1903 ई॰ से सन् 1920 ई॰ तक इन्होंने बड़ी कुशलतापूर्वक 'सरस्वती' नामक पत्रिका का सम्पादन किया। इनकी हिन्दी सेवाओं से प्रभावित होकर इनको काशी नागरी प्रचारिणी सभा ने 'आचार्य' की उपाधि से सम्मानित किया। सन् 1938 ई॰ में इनका स्वर्गवास हो गया। साहित्यिक योगदान युग-प्रवर्तक आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने भारतेन्दु युग की भाषागत त्रुटियों को दूर करके हिन्दी भाषा एवं उसकी शैली को परिमार्जित किया। उन्होंने सबसे महत्त्...
Comments
Post a Comment